डोंगरवाड़ा सरपंच पद विवाद: हाईकोर्ट के निर्देश पर कैलाश दायमा ने कलेक्टर के समक्ष दाखिल किया अभ्यावेदन आपराधिक प्रकरणों के बीच माखन लाल की पुनः बहाली पर उठाए सवाल

                   नर्मदापुरम संवाददाता-

ग्राम पंचायत डोंगरवाड़ा में सरपंच पद को लेकर चल रहा विवाद अब एक बार फिर जिला प्रशासन के समक्ष पहुंच गया है। उच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में पूर्व स्थानापन्न सरपंच कैलाश दायमा ने 8 सितंबर को कलेक्टर के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है। कैलाश ने अपने अभ्यावेदन के साथ संबंधित दस्तावेज एवं आदेशों की प्रतियां भी संलग्न कर पावती प्राप्त की है।

यह है पूरा घटनाक्रम
बताया गया है कि 16 मार्च 2026 को कलेक्टर द्वारा तत्कालीन सरपंच माखन लाल कीर के विरुद्ध दर्ज 28 आपराधिक प्रकरणों का हवाला देते हुए एक वर्ष के लिए जिला बदर का आदेश पारित किया गया था। इसके बाद कैलाश दायमा को स्थानापन्न सरपंच की जिम्मेदारी मिली।
कैलाश दायमा के अनुसार, मूल सरपंच के जिला बदर होने के बाद रिक्त हुए पद पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं ग्राम पंचायत सचिव की प्रक्रिया के तहत 4 मई 2026 को बहुमत एवं चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें ग्राम पंचायत डोंगरवाड़ा का सरपंच चुना गया था।इसके बाद विभागीय आयुक्त द्वारा 2 जून 2026 को माखन लाल कीर की जिला बदर अवधि को शिथिल करते हुए उन्हें प्रत्येक सप्ताह संबंधित थाने में उपस्थित होकर हाजिरी दर्ज कराने की शर्त लगाई गई थी।कैलाश का आरोप है कि 7 जुलाई 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा उन्हें बिना विधिक सुनवाई अथवा कारण बताओ नोटिस दिए पद से पृथक कर माखन लाल कीर को पुनः सरपंच पद पर बहाल कर दिया गया। इसी निर्णय को कैलाश ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने दिया अभ्यावेदन का अवसर
मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण किया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर कलेक्टर के समक्ष नए सिरे से अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी तथा सक्षम प्राधिकारी को अभ्यावेदन पर विधि अनुसार विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए।

अब कलेक्टर के निर्णय पर निगाहें
उच्च न्यायालय के 3 सितंबर के आदेश के बाद कैलाश दायमा ने 8 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। अब इस मामले में जिला प्रशासन के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।कैलाश ने अपने अभ्यावेदन में 7 जुलाई को जारी आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए उसे निरस्त करने तथा उन्हें पुनः सरपंच पद का कार्यभार सौंपने की मांग की है। हालांकि, अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभ्यावेदन एवं संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।

 

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