आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। नगरपालिका परिषद इटारसी ने जनगणना के अनिवार्य प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने पर तीन शासकीय कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में शिथिलता को गंभीरता से लेते हुए की गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय कन्या स्नातक महाविद्यालय इटारसी के रविन्द्र कुमार चौरसिया (सहायक प्राध्यापक), स्नेहांशु सिंह (सहायक प्राध्यापक) एवं हरिशंकर निगोते (सहायक ग्रेड-03) को जनगणना कार्य के लिए प्रगणक एवं पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। इन कर्मचारियों को 23 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होना था, लेकिन तीनों ही प्रशिक्षण केंद्र पर उपस्थित नहीं हुए।नगरपालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं जनगणना चार्ज अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहना भारतीय जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का उल्लंघन है। इस अधिनियम के तहत कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित व्यक्ति को तीन वर्ष तक के कारावास अथवा 1000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।नोटिस में संबंधित कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण जिला कलेक्टर को भेजा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं कर्मचारियों की होगी।प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर नर्मदापुरम, जनगणना निदेशालय भोपाल और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को भी प्रेषित की है। स्पष्ट है कि जनगणना 2027 जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
