राजघाट पर अंधेरगर्दी: नपा इंजीनियर्स की लापरवाही से 3 लाख की स्टील ग्रिल मिट्टी में दफन, जनता के पैसे की बर्बादी का आरोप

राजघाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य के दौरान नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि लगभग तीन लाख रुपये मूल्य की उच्च गुणवत्ता वाली करीब 30 स्टील ग्रिलों को सुरक्षित निकालने के बजाय उन पर सीधे मिट्टी डालकर जमीन में दबाया जा रहा है। इससे शासकीय संपत्ति की बर्बादी होने का आरोप लगाया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि किसी भी पुनर्विकास कार्य में पुरानी उपयोगी सामग्री को सुरक्षित निकालकर नगर पालिका के स्टोर में जमा किया जाता है, ताकि उसका उपयोग अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किया जा सके। लेकिन राजघाट पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि ग्रिलों को हटाने की बजाय उन पर मिट्टी की भराई कर दी गई, जिससे लाखों रुपये की सामग्री बेकार हो गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियर नियमित रूप से कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि फील्ड मॉनिटरिंग के अभाव में ठेकेदार मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।इस मामले को लेकर क्षेत्र के नागरिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यह जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग है और उपयोगी सामग्री को मिट्टी में दबाना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। नागरिकों ने मांग की है कि दबाई गई स्टील ग्रिलों को तत्काल बाहर निकाला जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।लोगों ने यह भी मांग की है कि कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं करने वाले संबंधित इंजीनियरों और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन और संपत्ति की इस प्रकार बर्बादी न हो।

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