
सिवनी मालवा (पवन जाट )
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सशक्तिकरण अभियान के अंतर्गत आईटी सेंटर, महिला एवं बाल विकास विभाग सिवनी मालवा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश श्रीमती तबस्सुम खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।शिविर को संबोधित करते हुए न्यायाधीश श्रीमती खान ने कहा कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। महिलाएं करुणा, शक्ति और बलिदान की प्रतिमूर्ति हैं और देश के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का इतिहास महिलाओं की वीरता, त्याग और साहस की गाथाओं से भरा हुआ है। बलिदान के रूप में पन्ना धाय का नाम सबसे पहले लिया जाता है, वहीं शक्ति के रूप में रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई होलकर जैसी महान महिलाओं ने देश के लिए अपना योगदान दिया है।उन्होंने कहा कि कानून में महिलाओं को व्यापक अधिकार प्रदान किए गए हैं और सभी महिलाओं व बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने बालिकाओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार की अनुचित घटना होती है तो तुरंत अपने माता-पिता, अभिभावकों या शिक्षकों को इसकी जानकारी दें। ऐसी स्थिति में डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कानून हमेशा पीड़ित के साथ खड़ा रहता है।श्रीमती खान ने बताया कि 8 मार्च 1975 को महिलाओं के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया गया था, तभी से यह दिन पूरे विश्व में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों को बालिकाओं के अधिकार, महिला कानून, लैंगिक समानता, यौन अपराध, शोषण, भ्रूण हत्या, पास्को एक्ट तथा न्यायालयीन प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी।इस दौरान उन्होंने बताया कि 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आपसी सहमति से न्यायालय में लंबित प्रकरणों का राजीनामा कर उनका निराकरण किया जा सकता है।कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी श्रीमती शंकुतला गौर ने भी महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। शिविर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बालिकाएं और महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
