शिक्षाविद और साहित्यकार हरगोविंद शर्मा पंचतत्व में विलीन नर्मदापुरम।

     (प्रतीक पाठक नर्मदापुरम)

टिमरनी नगर के प्रख्यात शिक्षाविद एवं साहित्यकार हरगोविंद शर्मा सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। वे लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे और अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से समाज में विशेष पहचान बनाई।स्वर्गीय हरगोविंद शर्मा अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे चंद्रशेखर शर्मा, शशिशेखर शर्मा, स्व. ओमप्रकाश शर्मा एवं डॉ. संतोष शर्मा के पूज्य पिताजी थे, जबकि आशुतोष, अनिमेष, अभिषेक और अनुराग के स्नेही दादाजी थे। उनके निधन से परिवारजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।उनकी अंतिम यात्रा उनके निज निवास तुलसी कुंज, पुरानी नगर पालिका के सामने से प्रारंभ होकर टिमरनी मुक्तिधाम पहुंची। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, मित्रगण एवं परिजन शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। मुक्तिधाम पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न हुआ हरगोविंद शर्मा ने अपने जीवनकाल में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने अनेक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और साहित्य सृजन के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य किया। उनकी रचनाएं सामाजिक मूल्यों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत थीं।नगर के विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके सादगीपूर्ण जीवन, अनुशासन और समर्पण भावना को याद करते हुए कहा कि उनका जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई।

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