फर्जी शपथ-पत्र और कूटरचित वारिसान के जरिए बहनों की पैतृक जमीन हड़पने का आरोप

शहर के मालाखेड़ी क्षेत्र में बहनों के हक की पैतृक जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम दर्ज कराने का मामला सामने आया है। मामले में पीड़िता ने अपने भाइयों और तत्कालीन पटवारी पर मिलीभगत कर कूटरचित वारिसान सूची एवं झूठे शपथ-पत्र के आधार पर नामांतरण कराने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा विवादित जमीन के क्रय-विक्रय एवं हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
मालाखेड़ी निवासी सावित्री दीक्षित, पुत्री स्व. बद्री प्रसाद दुबे, की ओर से प्रस्तुत शिकायत के अनुसार उनके पिता का निधन वर्ष 2003 में हुआ था। परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं। आरोप है कि उनके भाई कैलाश दुबे और अशोक दुबे ने तत्कालीन पटवारी के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी हस्ताक्षर और झूठा शपथ-पत्र तैयार कराया। इसके बाद वारिसान सूची से बहनों के नाम हटाकर खसरा नंबर 70/113 की पैतृक भूमि को केवल भाइयों के नाम दर्ज करा लिया गया।
दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बहनों को मृत अथवा गैर-मौजूद दर्शाते हुए कथित रूप से कूटरचित वारिसान सूची तैयार की गई और उसके आधार पर एकतरफा नामांतरण करा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि जमीन के वैध उत्तराधिकारियों को इसकी जानकारी दिए बिना रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।
जमीन बेचने की तैयारी का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि अब विवादित भूमि को तीसरे पक्ष को बेचने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि बिना विधिवत बंटवारे और सभी वैध वारिसों की सहमति के जमीन का क्रय-विक्रय किया जाना उनके अधिकारों को प्रभावित करेगा।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़िता ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। कथित फर्जी वारिसान सूची और शपथ-पत्र की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही विवादित भूमि के किसी भी प्रकार के विक्रय, नामांतरण या हस्तांतरण पर जांच पूरी होने तक रोक लगाई जाए तथा सभी वैध वारिसों के कानूनी अधिकार सुरक्षित किए जाएं।
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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