
प्रतीक पाठक नर्मदापुरम
जिला मुख्यालय से सटे सिवनी मालवा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बांकोखेड़ी से झीनापुर बासनिया तक बन रही सड़क ने विभाग के विकास दावों की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की जा रही डामर सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब बताई जा रही है कि वह उंगलियों से कुरेदने पर ही टूटने लगती है। यह मामला केवल एक सड़क तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित सांठगांठ की ओर इशारा करता है, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि PWD के जिम्मेदार अधिकारी, जिनमें एसडीओ और अन्य इंजीनियर शामिल हैं, निर्माण स्थल पर निगरानी करने के बजाय दफ्तरों में बैठकर ही कार्यों को मंजूरी दे रहे हैं। ऐसे में ठेकेदारों द्वारा तकनीकी मानकों की अनदेखी कर मनमानी तरीके से निर्माण कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि रात के समय सड़क निर्माण कर गुणवत्ता जांच से बचने का प्रयास किया जा रहा है।मामले में नया कलेक्टर से ग्रामीणों को काफी उम्मीदें हैं कि वे इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएंगे और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।वहीं, सरपंच लक्ष्मण सिंह रघुवंशी सहित ग्रामीणों ने जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, तो ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने यह तक कहा कि उसे किसी प्रकार की कार्रवाई का भय नहीं है, क्योंकि उसकी “ऊपर तक पहुंच” है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर और भी संदेह गहरा गया है।स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया है और उनकी मांग है कि सड़क निर्माण की स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी जांच कराई जाए, संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के मामलों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो क्षेत्र की सड़कें कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी और जमीनी हकीकत आम जनता के लिए जोखिम भरी बनी
