
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पटवारे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान मंडी परिसर में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा समय में मक्के और सोयाबीन की फसलों के दाम लगातार गिर रहे हैं, जबकि खेती की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी के बढ़ते खर्च के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।संतोष पटवारे ने मीडिया से चर्चा में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मक्के की लागत लगभग 1600 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। नियमानुसार किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिलना चाहिए, जो करीब 2400 रुपये प्रति क्विंटल होता है। लेकिन हकीकत यह है कि किसानों को लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफएक्यू मापदंड वाला अच्छा गुणवत्ता का मक्का भी लगभग 1600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में खरीदा जा रहा है, जो किसानों के साथ अन्याय है।पटवारे ने मंडी अधिनियम की धारा 36 का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीदी करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद मंडी में खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।किसानों के धरने के कारण मंडी में कुछ समय तक खरीदी प्रभावित रही। मंडी परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा। किसानों ने एक स्वर में मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और मक्के व सोयाबीन की खरीदी समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मोल मिल सके।वहीं, मंडी सचिव ने किसानों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मक्के की सरकारी खरीदी को लेकर अभी तक शासन स्तर से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मंडी में व्यापारी खुले सौदे के तहत खरीदी कर रहे हैं, जिसमें भाव आवक और मांग के आधार पर तय होते हैं। मंडी सचिव का यह भी कहना है कि सिवनी मालवा मंडी में आसपास की अन्य मंडियों की तुलना में औसतन बेहतर दाम मिल रहे हैं।हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर एमएसपी लागू नहीं होगा, तब तक उनकी समस्याएं दूर नहीं होंगी। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
