
नर्मदापुरम संवाददाता-
नगर पालिका परिषद में संपत्ति कर वसूली से जुड़े ₹7 करोड़ 78 लाख 91 हजार 654 के कथित राजस्व गबन का मामला सामने आने के बाद शहर में हलचल मच गई है। कोतवाली पुलिस ने लंबी जांच के बाद कंप्यूटर ऑपरेटर भुवन मेहता और नियमित कर्मचारी हरीश गोस्वामी के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं आपराधिक न्यास भंग से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच संपत्ति कर वसूली में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।इस मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि करोड़ों रुपये के राजस्व से जुड़े संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को किस आधार पर और किसके निर्देश पर सौंपी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले को केवल दो कर्मचारियों के स्तर पर अंजाम दिया जाना संभव प्रतीत नहीं होता, इसलिए पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।सूत्रों का दावा है कि एफआईआर में दर्ज ₹7.78 करोड़ की राशि प्रारंभिक आंकड़ा हो सकती है। उनका कहना है कि यदि पिछले दो दशकों के संपत्ति कर, दुकान किराया, राजस्व रजिस्टर तथा डिजिटल रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए तो कथित अनियमितताओं का दायरा और बड़ा हो सकता है। हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही संभव होगी।स्थानीय नागरिकों ने इस मामले की तुलना प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े पूर्व मामलों से करते हुए कहा कि शुरुआती जांच में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, जबकि बाद में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी उजागर हुई थी। इसी आधार पर इस मामले में भी व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।शहरवासियों का कहना है कि संपत्ति कर की मूल रसीदों, ऑनलाइन रिकॉर्ड, दुकान किराया रजिस्टर, संदिग्ध बैंक खातों और संबंधित अवधि में पदस्थ अधिकारियों की भूमिका एवं वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कराई जानी चाहिए। अब सभी की निगाह इस बात पर है कि जांच केवल दो आरोपियों तक सीमित रहती है या जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संभावित जिम्मेदार व्यक्तियों तक भी पहुंचती है।नोट: पुलिस द्वारा फिलहाल दो कर्मचारियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता संबंधी दावे अभी जांच के अधीन हैं और उनकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
