
सिवनी मालवा (पवन जाट)
नगर में बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने आम नागरिकों से लेकर प्रशासन तक को हैरान कर दिया। दोपहर के समय जीप, ट्रैक्टर और कारों पर सवार छात्र-छात्राओं का हुजूम तेज डीजे की धुन पर नाचता-गाता हुआ नगर की मुख्य सड़कों से गुजरा। यह पूरा घटनाक्रम शासकीय सांदीपनी स्कूल में आयोजित फेयरवेल कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है, जो स्कूल परिसर से बाहर निकलकर सार्वजनिक सड़कों पर पहुंच गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई छात्र चलती गाड़ियों के बोनट, बंपर और छत पर बैठे नजर आए। कुछ युवक ट्रैक्टरों पर खड़े होकर नाचते दिखे, जबकि अन्य वाहनों के किनारे लटककर स्टंट करते रहे। इस दौरान न तो हेलमेट का ध्यान रखा गया और न ही यातायात नियमों का। अचानक बने इस जुलूस के कारण कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ और राहगीरों में दहशत का माहौल बन गया।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फेयरवेल जैसे आयोजन छात्रों के जीवन की एक भावनात्मक याद होते हैं, लेकिन जब यह जश्न सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। लोगों का यह भी कहना है कि यदि इस दौरान कोई दुर्घटना घटित हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता।मामले के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि फेयरवेल कार्यक्रम विद्यालय परिसर में ही आयोजित किया गया था। छात्रों द्वारा स्कूल से बाहर इस तरह का प्रदर्शन किए जाने की पूर्व सूचना प्रबंधन को नहीं थी। स्कूल प्राचार्य ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रद्द करने तथा इसमें शामिल छात्र-छात्राओं को नोटिस जारी करने की बात कही है। साथ ही परीक्षा तक निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है।वहीं शिक्षा विभाग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर सड़क पर इस प्रकार का प्रदर्शन न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है। पूरे घटनाक्रम की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या जश्न मनाने की आज़ादी के साथ जिम्मेदारी की भावना भी उतनी ही जरूरी नहीं है। फेयरवेल यादों के लिए होना चाहिए, न कि ऐसी लापरवाही के लिए जो भविष्य पर सवाल खड़े कर दे।
