
प्रतीक पाठक नर्मदापुरम
माघ मास की पावन गुप्त नवरात्रि के तृतीय दिवस पर शक्ति उपासना के विशेष अनुष्ठान श्रद्धा और गोपनीय विधि-विधान के साथ संपन्न हुए। इस अवसर पर दस महाविद्याओं में प्रमुख माँ त्रिपुर सुंदरी (भगवती षोडशी) की दिव्य सेवा एवं गुप्त साधना पंडित यश उपाध्याय द्वारा विधिवत रूप से संपन्न की गई। साधना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सिद्धि नहीं, बल्कि लोक कल्याण, शांति और समृद्धि की कामना रहा।पं. यश उपाध्याय ने साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माँ त्रिपुर सुंदरी को तंत्र शास्त्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। वे केवल सौंदर्य की देवी नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, शक्ति और मोक्ष की अधिष्ठात्री भी हैं। उन्हें ललिता अंबा के नाम से भी जाना जाता है, जो सृष्टि के सृजन, पालन और संहार की सूक्ष्म शक्तियों का संचालन करती हैं। माँ का यह स्वरूप भोग और मोक्ष के अद्भुत संतुलन का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि माँ षोडशी की आराधना से साधक को सांसारिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। गुप्त नवरात्रि में की गई यह साधना विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि इस काल में की गई उपासना शीघ्र सिद्धि प्रदान करती है।
साधना के फलस्वरूप माँ त्रिपुर सुंदरी भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करती हैं, मानसिक अशांति और क्लेशों से मुक्ति देती हैं तथा जीवन में आर्थिक और आध्यात्मिक समृद्धि का संतुलन स्थापित करती हैं। साथ ही, वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करती हैं।पं. यश उपाध्याय ने कहा, “माँ त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप यह संदेश देता है कि संसार में रहते हुए भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है। यही भोग और मोक्ष के समन्वय की दिव्य शक्ति है।”
