सिवनी मालवा (पवन जाट) अमलाड़ा कला / माता ढाना मार्ग की बदहाल हालत एक बार फिर सुर्खियों में है। क्षेत्र के किसानों और आदिवासी परिवारों को इस जर्जर सड़क के कारण किस तरह की तकलीफ़ों से गुजरना पड़ रहा है, इसकी ताज़ा घटना ने प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि सांसद और विधायक के आश्वासन के बावजूद आज तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया, जिससे खेती-किसानी और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।घटना के अनुसार, ग्रामीणों की फसल तैयार थी और मंडी भेजने के लिए पिकअप वाहन बुलाया गया था। लेकिन जैसे ही वाहन सड़क पर पहुंचा, गहरे गड्ढों और कीचड़ में उसके पहिए धँस गए। ड्राइवर ने कई बार इंजन तेज किया, पर वाहन आगे नहीं बढ़ पाया और उसे लौटना पड़ा। ड्राइवर ने साफ कहा कि इस रास्ते पर गाड़ी ले जाना जोखिम भरा है। यह सुनकर किसानों की चिंता बढ़ गई क्योंकि फसल वापस खेत पर नहीं रखी जा सकती थी और अनाज खराब होने का खतरा था।मजबूर होकर किसानों ने वही रास्ता चुना जिसे वे हर बारिश के मौसम में अपनाने को मजबूर होते हैं—खुद अपनी उपज कंधों और सिर पर उठाकर पैदल ले जाना। ग्रामीणों ने बताया कि सामान्यतः पाँच मिनट की दूरी उन्हें कीचड़ और फिसलन भरी सड़क की वजह से लगभग पैंतीस मिनट में तय करनी पड़ी।किसान निलेश धनगर ने इस स्थिति पर गुस्सा जताते हुए कहा कि सड़क की अनुपस्थिति से उनकी लागत बढ़ती जा रही है।नुकसान हमारा, खर्चा हमारा और इंतजार भी हमें ही करना पड़ता है। क्या हमारी मेहनत सरकार को दिखाई नहीं देती?उन्होंने कहा कि हर बार अधिकारियों और नेताओं द्वारा आश्वासन दिया जाता है, लेकिन काम शुरू नहीं होता।स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। बरसात होते ही सड़क दलदल जैसी बन जाती है, वाहनों को वापस लौटना पड़ता है, फसल गिरकर खराब हो जाती है और मजदूरी व परिवहन की लागत दोगुनी हो जाती है। आदिवासी परिवारों का भी कहना है कि खराब सड़क के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों का आना-जाना तक मुश्किल हो जाता है।ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती घाटे का सौदा बन जाएगी और गांव की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
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