अर्चना गांव में नर्मदा परिक्रमा मार्ग की बदहाली उजागर — 1.5 किलोमीटर का रास्ता श्रद्धालुओं के लिए बना मुसीबत

सिवनी मालवा (पवन जाट)

नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील के ग्राम अर्चना गांव में मां नर्मदा परिक्रमा मार्ग की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक दावों के विपरीत बेहद चिंताजनक है। जहां शासन-प्रशासन प्रदेश भर में परिक्रमा मार्ग को पक्का और सुरक्षित बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं अर्चना गांव का डेढ़ किलोमीटर लंबा महत्वपूर्ण हिस्सा आज भी कच्चा, कीचड़ भरा और झाड़ियों से घिरा हुआ है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों परिक्रमा वासियों की श्रद्धा और सुरक्षा दोनों पर प्रश्न चिह्न भी खड़ा करती है।पापन उमरिया पंचायत से लेकर त्रिवेणी संगम गोंडा गांव तक फैला यह 1.5 किलोमीटर का रास्ता धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं का यही प्रमुख मार्ग है, लेकिन इसकी हालत सालों से जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है, जबकि गर्मी और सर्दी के मौसम में धूल, कांटे और घनी झाड़ियों के कारण पैदल चलना भी चुनौती बन जाता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई परिक्रमा वासी यहां फिसल कर गिर जाते हैं, सामान टूट जाता है और पैरों में खरोंचें लगना आम बात है।ग्रामीणों ने कई बार पंचायत, जनपद से लेकर तहसील स्तर तक इस मार्ग को पक्का करने की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रशासनिक फाइलों में यह कार्य ‘निर्माणाधीन’ या ‘स्वीकृति लंबित’ बताकर आगे बढ़ा दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी मौसम के दौरान किए गए आश्वासन भी कभी धरातल पर उतर नहीं पाए।धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले मार्ग की उपेक्षा से परिक्रमा वासियों में भी असंतोष बढ़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि 1.5 किलोमीटर की यह दूरी सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि उनकी आस्था का हिस्सा है, और इसका सुरक्षित एवं सुगम होना अनिवार्य है। खास बात यह है कि यह मार्ग नर्मदा किनारे स्थित कई धार्मिक स्थलों को भी जोड़ता है, इसलिए इसका दुरुस्त होना बेहद आवश्यक है।अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कब संज्ञान में लेता है और परिक्रमा वासियों के लिए यह महत्वपूर्ण मार्ग पक्का व सुरक्षित कब बनाया जाता है। फिलहाल अर्चना गांव और आसपास के श्रद्धालु प्रशासन से जल्द कार्यवाही की अपेक्षा कर रहे हैं।

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