
(प्रतीक पाठक नर्मदापुरम)
एक ओर सरकारें पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्षिक मेले में प्रशासनिक लापरवाही ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेले के मुख्य मार्ग पर नगरपालिका परिषद द्वारा जेसीबी मशीन से गहरे गड्ढे खुदवाए जाने के बाद हजारों श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।व्यवस्था के नाम पर अव्यवस्था जिस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे मेले की ओर जा रहे हैं, उसी रास्ते पर खुदाई कर दी गई है। पत्थरों और मिट्टी के ढेर के बीच से गुजरते समय कई लोग फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था के रास्ता अवरुद्ध करना प्रशासन की संवेदनहीनता दर्शाता है।सुरक्षा मानकों की अनदेखी विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में इस तरह के खुले गड्ढे ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो सकते हैं।भगदड़ का खतरा: अफरातफरी की स्थिति में लोग गड्ढों में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।आपातकालीन सेवाएं बाधित: आगजनी या चिकित्सा आपात स्थिति में एम्बुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।रात्रिकालीन जोखिम: अंधेरा होने के बाद दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।जनता में आक्रोशक्षेत्रीय लोगों ने इस कदम को ‘अमानवीय’ बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य आवश्यक था तो उसे मेले के समापन तक टाला जा सकता था या पहले से वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाना चाहिए था।मामले के तूल पकड़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने तत्काल गड्ढों को भरकर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।
