(प्रतीक पाठक नर्मदापुरम)
शहर की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जहाँ गरीबों के हिस्से के राशन में सवा दो लाख रुपये के गबन के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई के बजाय विभागीय संरक्षण मिलता दिखाई दे रहा है। ग्वालटोली क्षेत्र के वार्ड 20, 29 और 33 की राशन दुकानों का संचालन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है, जिससे हितग्राही परेशान हैं।
सोमवार को वार्ड 20 व 29 के लिए आवंटित पीओएस राशन दुकान क्रमांक 2601062 (श्री कृष्ण सुदर्शन) बंद रही। इसके बावजूद हितग्राहियों के अंगूठे वार्ड 33 की दुकान 2601098 (श्रीकृष्णा उपभोक्ता भंडार) की पीओएस मशीन से लगवाकर राशन वितरित किया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों दुकानों का संचालन एक ही स्थान और एक ही टेबल से किया गया। हितग्राही घंटों दुकान खुलने का इंतजार करते रहे और बाद में भटकते हुए दूसरी दुकान पर पहुंचे।विभागीय जांच में सहायक आपूर्ति अधिकारी द्वारा दुकान संचालक व विक्रेता को 2 लाख 25 हजार रुपये के अनाज गबन का दोषी पाया गया था। आदेश में सात दिनों के भीतर राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो राशि जमा हुई और न ही थाना ग्वालटोली में एफआईआर दर्ज की गई।
नियमों के अनुसार डिफाल्टर दुकान को निष्पक्ष एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन उल्टा गबन की आरोपी दुकान को दूसरी दुकान से जोड़कर उसी विवादित समूह को संचालन सौंप दिया गया। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि दोनों दुकानों का संचालन पर्दे के पीछे से एक ही प्रभावशाली व्यक्ति कर रहा है।इस पूरे मामले का खामियाजा गरीब हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर दुकान न खुलना, अनाज मांगने पर अभद्रता और शिकायतों की अनदेखी आम बात हो गई है।
इनका कहना है“दुकान के विरुद्ध प्रकरण दर्ज है और नोटिस जारी किया गया है। जल्द जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”रश्मि साहू, जिला आपूर्ति अधिकारी, नर्मदापुरम
अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुली धांधली पर कब सख्त कदम उठाता है या गरीबों का राशन यूँ ही रसूख और लापरवाही की भेंट चढ़ता रहेगा।
राशन घोटाले के दोषियों पर मेहरबान विभाग सवा दो लाख गबन के बाद भी एफआईआर नहीं, दूसरी दुकान का प्रभार ‘इनाम’ में मिला

