
प्रतीक पाठक नर्मदापुरम
आस्था और परंपरा के महापर्व नर्मदा जयंती महोत्सव को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता के आरोप सामने आए हैं। शहर के मोर्चली चौक स्थित साईं गणेश मंदिर समिति द्वारा पिछले 45 वर्षों से लगातार निकाली जा रही भव्य शोभायात्रा आज भी शासकीय सहयोग से वंचित है। यही शोभायात्रा सेठानी घाट के जल मंच पर होने वाले माँ नर्मदा के महा-अभिषेक का प्रारंभिक आधार मानी जाती है।समिति के संयोजक प्रीतम सोनी ने बताया कि यह शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से आज तक किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा इसी जल मंच से शोभायात्रा के लिए ₹50 हजार की वार्षिक सहायता की घोषणा की गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह राशि फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी।समिति का आरोप है कि प्रशासन जल मंच की सजावट, मंच निर्माण, लाइटिंग एवं अन्य आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन जिस धार्मिक परंपरा से पूरा महोत्सव प्रारंभ होता है, उसके लिए अधिकारियों की संवेदनशीलता नजर नहीं आती। प्रीतम सोनी के अनुसार, 8 से 10 दिनों तक चलने वाले नर्मदा पुराण, प्रतिदिन भंडारे, बैंड-बाजे, आतिशबाजी और कलश यात्रा सहित पूरे आयोजन पर लगभग ₹1 लाख का खर्च आता है, जिसे समिति अपने स्तर पर वहन कर रही है।नगर पालिका और सीएमओ को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। विडंबना यह है कि प्रशासन समिति को जल मंच तक पहुंचने के लिए पास तो जारी करता है, लेकिन सहयोग के नाम पर कोई पहल नहीं करता।अब समिति ने इस विषय को सीधे शासन के संज्ञान में लाने का निर्णय लिया है। आगामी नर्मदा जयंती कार्यक्रम के दौरान जल मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं जिले के प्रभारी मंत्री के आगमन पर उन्हें लिखित और मौखिक शिकायत सौंपने की तैयारी है। समिति का कहना है कि यदि अब भी इस ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा को नजरअंदाज किया गया, तो यह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ अन्याय होगा।
