
(पवन जाट)
सिवनी मालवा (नर्मदापुरम)।
नगर पालिका परिषद सिवनी मालवा द्वारा दमाड़िया वार्ड क्रमांक एक क्षेत्र में निर्मित कचरा घर समीपस्थ ग्राम हलसूल के ग्रामीणों के लिए बीते कई वर्षों से गंभीर समस्या बना हुआ है। कचरा घर में लगातार जलाए जा रहे कचरे, प्लास्टिक और पन्नियों से निकलने वाला जहरीला धुआं गांव की ओर फैल रहा है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।ग्रामीणों के अनुसार धुएं के कारण गांव में अस्थमा, सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन, खांसी और एलर्जी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गांव में घंटों तक धुएं की परत छाई रहती है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।ग्रामीणों ने बताया कि कचरा घर में केवल घरेलू कचरा ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, पन्नियां और अन्य अपशिष्ट भी जलाया जाता है। प्लास्टिक जलने से निकलने वाला धुआं मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक होता है, इसके बावजूद खुले में कचरा जलाने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।कचरे के ढेर के कारण गांव में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इससे मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही कचरा घर से आवारा कुत्ते गांव की ओर पहुंच जाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है। कई परिवारों ने बच्चों को बाहर खेलने से रोक दिया है।स्थिति को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि कचरा घर के आसपास गोवंश खुलेआम विचरण करते हैं और प्लास्टिक व पन्नियों को खा रहे हैं। इससे गोवंश के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जो पर्यावरण और पशु कल्याण की दृष्टि से चिंताजनक है।ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन किसानों के खेतों में जलने वाले अवशेषों पर तो त्वरित कार्रवाई करता है, लेकिन हलसूल गांव में वर्षों से जारी इस समस्या पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।अब ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर सिवनी मालवा एसडीएम को शिकायत सौंपने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों की मांग है कि कचरा घर को आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए, खुले में कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और गांव को इस जहरीले धुएं व गंदगी से जल्द राहत दिलाई जाए।
