
(पवन जाट)
सिवनी मालवा (नर्मदापुरम)।
ग्राम पंचायतों से जुड़ी लंबित समस्याओं और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सिवनी मालवा सरपंच संघ का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शनिवार को सातवें दिन भी लगातार जारी रहा। जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में चल रहे इस आंदोलन के दौरान शनिवार को सरपंच संघ द्वारा शासन-प्रशासन की सद्बुद्धि और समस्याओं के शीघ्र समाधान की कामना को लेकर भगवान श्री सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया गया।धरना स्थल पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। विशेष बात यह रही कि यह कथा बनापुरा निवासी 16 वर्षीय आयुष शर्मा, पिता संतोष वर्मा द्वारा संपन्न कराई गई। आयुष शर्मा की यह पहली कथा रही, जिसे उन्होंने सरपंच संघ की मांगों के समर्थन और शासन के सकारात्मक निर्णय की आशा के साथ किया। कथा के दौरान सभी ने शांतिपूर्ण वातावरण में समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना की।इससे पूर्व आंदोलन के छठे दिन नर्मदापुरम से सिवनी मालवा पहुंचे ब्लॉक अध्यक्ष अखिलेश सिंह सोलंकी ने धरना स्थल पर पहुंचकर सरपंचों को संबोधित किया। उन्होंने सरपंच संघ के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव के नाम आवेदन सौंपा, जिसमें ग्राम पंचायतों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा गया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की नींव हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा के कारण सरपंचों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।सरपंच संघ ने बताया कि 12 जनवरी 2026 से शुरू हुआ यह आंदोलन अब और तेज होता जा रहा है। मांगों पर अब तक किसी ठोस निर्णय या आश्वासन के अभाव में सरपंचों में नाराज़गी बढ़ रही है। इसी क्रम में संघ ने शासकीय कार्यक्रमों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। सरपंचों ने स्पष्ट किया कि संकल्प समाधान अभियान, आनंद उत्सव सहित अन्य सरकारी आयोजनों में वे भाग नहीं लेंगे।धरना-प्रदर्शन का असर अब ग्रामीण विकास कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्य, मनरेगा से जुड़े कार्य, भुगतान प्रक्रियाएं और अन्य प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।सरपंच संघ के अध्यक्ष उमेश अंकिले ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि ग्राम पंचायतों और ग्रामीण जनता के अधिकारों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगों पर गंभीरता से निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।
